अभियंता संगोष्ठी कार्यशाला

निर्माण में रिसाइकिलिंग तथा सिविल ट्रैफिक मैनेजमेंट के व्यवहारिक सुझावों का लाभ राज्य को मिले : श्री नरसिम्हन
अन्तर्राष्ट्रीय तकनीकी कार्यशाला एवं अभियंता संगोष्ठी का शुभारंभ

रायपुर, 07 दिसंबर 2009 राज्यपाल श्री ई.एस.एल. नरसिम्हन ने आज रायपुर में छत्तीसगढ़ डिप्लोमा इंजीनियर्स एशोसिएशन के तत्वाधान में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय तकनीकी कार्यशाला एवं अभियन्ता संगोष्ठी का शुभारंभ किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि संगोष्ठी में विचार-विमर्श पश्चात् सुझावों के व्यवहारिक रूप एवं परिणाम धरातल पर दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस संगोष्ठी में भवन सहित आधारभूत संरचनाओं के निर्माण में डिसमेन्टल कांक्रीट के पुर्नउपयोग , जल के उपयोग एवं रिसाइकिलिंग तथा सिविल ट्रैफिक मैनेजमेंट जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर होने वाली विचार-विमर्श एवं व्यवहारिक सुझावों का लाभ राज्य को मिल सकेगा। श्री नरसिम्हन ने कहा कि निर्माण कार्यों में होने वाली इस नवीन तकनीकी का लाभ वातावरण को सुरक्षित एवं सवंर्ध्दित करने के अलावा समय एवं संसाधनों की बचत में भी मिलेगा।

राज्यपाल ने कहा कि देश एवं राज्य का विकास वहां की सड़कें, पुल-पुलिया, सिंचाई एवं विद्युत ऊर्जा के साधन, बांध जैसे आधारभूत संरचनाओं से होता है और इनके निर्माण की जिम्मेदारी अभियंताओं पर होती है। उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य की जनता की अपेक्षाओं और सपनों को साकार करने में अभियंतागण अपनी पूरी शक्ति लगाएंगे।

श्री नरसिम्हन ने कहा कि राज्य में निर्माण एवं विकास कार्यों की व्यापक संभावनाएं हैं और इसके लिए हमारे इंजीनियर्स को पूरी प्रतिबध्दता के साथ तैयार रहना चाहिए। निर्माण, पुनर्उध्दार, उसका विस्तार एवं वृहद निर्माण के अलावा पुराने पुल-पुलियों को नया रूप देकर उन्हें और मजबूत बनाने तथा फ्लाई ओवर आदि का भी निर्माण जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। नये निर्माण कार्यो के दौरान यदि हम पुराने कार्यो के डिस्मेंटल कांक्रीट का पुनर्उपयोग करते हैं तो इससे निर्माण कार्यो में संसाधनों, मानवीय श्रम, समय एवं आर्थिक बचत होगी और यह राज्य के हित में होगा। उन्होंने यह भी कहा कि डिसमेन्टल कांक्रीट का रिसायकिलिंग जैसी अवधारणा का कम समय एवं कम लागत में व्यवहारिक रूप में राज्य के किसी भवन में उपयोग होना चाहिए और वे इसका भविष्य में अवलोकन करना चाहेंगे। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में इस प्रकार के नवीन अनुसंधानों का प्रयोग किसी भी हालत में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि अभियंतागण अपनी दृढ़ता एवं विश्वास से राज्य को इस बहुपयोगी तकनीकी का लाभ दिला सकते हैं। राज्यपाल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई ऐसे भवन हैं, जो गिर चुके हैं या ध्वस्त हुए हैं उनकी डिसमेन्टल कांक्रीट का उपयोग किया जाना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि हमें कांक्रीटों के जंगल बनाने के स्थान पर लोगों के रहने के लिए हरितीमायुक्त आवास बनाना चाहिए। इसके अलावा वर्षा जल के सबसे अधिक संग्रहण एवं उनके संरक्षण पर भी जोर देना होगा, साथ ही अभियंताओं द्वारा मानवीय आवास सहित अन्य उपयोगी भवनों में रेन हार्वेस्टिंग जैसी संकल्पना को मूर्त रूप देने एवं कम लागत ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इसे शासकीय भवनों से शुरूआत कर और जनोपयोगी बनाया जा सकता है।

श्री नरसिम्हन ने कहा कि सिविल ट्रैफिक मैनेजमेंट आज की विशेष आवश्यकता है और इसे सुचारू एवं व्यवस्थित बनाने की जिम्मेदारी हमारे अभियंताओं की है। उन्होंने कहा कि यातायात व्यवस्था ठीक करने के लिए बड़ी सड़कों के निर्माण से पहले जन-सामान्य के लिए फुटपाथ बनने चाहिए, जिससे लोगों की आवागमन की सुविधा आसान हो सके। इसके अलावा फ्लाईओव्हर एवं अन्य भवन निर्माण में गुणवत्ता बरकरार रखने की जरूरत है। उन्हें यह भी ख्याल रखना चाहिए कि जो भी निर्माण कार्य हों, वे लम्बे समय तक गुणवत्ता बनाये रखने में समर्थ हो।

राज्यपाल ने अभियंताओं से आग्रह करते हुए कहा कि निर्माण कार्यों के लिए कागजी प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम करना चाहिए ताकि प्रदेश के दूरस्थ अंचलों में निर्मित होने वाले पुलिस सहित अन्य विभागों के भवनों के लिए शासन से आवंटित बजट राशि का समय पर सदुपयोग हो सके। उन्होंने कहा कि अभियंतागण राज्य के बिल्डर्स हैं और लोगों को उन पर भरोसा है कि वे राज्य के विकास को मजबूती प्रदान करने का हर संभव प्रयास करेंगे।

कार्यक्रम में प्रमुख अभियंता लोक निर्माण श्री पी.के. जनवदे ने कहा कि प्रदेश में सड़कों के निर्माण में तारकोल (डामर) का रिसायकिलिंग की प्रक्रिया को अपनाया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य के शहरों सहित कई क्षेत्रों में अत्यंत पुराने भवन एवं जीर्ण-शीर्ण पुलिया सहित कई आधारभूत संरचनाओं का पुनर्उध्दार होना है, उसमें डिसमेन्टल कांक्रीट के पुनर्उपयोग की प्रक्रिया एवं अवधारणा तकनीकी अत्यंत उपयोगी होगी और इस तकनीकी का लाभ हमारे प्रदेश को मिलेगा। कार्यक्रम में चेक गणराज्य से उपस्थित सिविल इंजीनियर डॉक्टर पीटर स्टेमवर्क ने डिसमेन्टल कांक्रीट की रिसायकिलिंग का लाभ, सीमाएँ, पुराने निर्मित आधारभूत संरचनाओं की सामग्रियों के उपयोग की विधियाँ, टिकाऊपन, सिंचाई कार्यों के लिए निर्मित होने वाले बांधों के अपरदन की रोक, क्षमता एवं इसके अधिकाधिक उपयोग का प्रदर्शन के माध्यम से विस्तार से जानकारी दी। अभियंता संघ के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र टुटेजा ने स्वागत भाषण में संगोष्ठी के उद्देश्यों पर व्यापक रूप से प्रकाश डाला। संघ के उपाध्यक्ष श्री जाहिद खान ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

इस अवसर पर चेक गणराज्य के सिविल अभियंता नाटालिया पोकोरना, श्री जे.व्ही. बलाकेट, लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री के.के. मंधाता सहित अभियंता संघ के पदाधिकारीगण उपस्थित थे।