अमर शहीद नारायण सिंह

अमर शहीद की कर्म-भूमि के समग्र विकास के लिए विशेष पैकेज
सोनाखान का तेजी से हो रहा काया-कल्प

रायपुर, छत्तीसगढ़ के क्रांतिवीर अमर शहीद नारायण सिंह की जन्मभूमि और कर्मस्थली सोनाखान के कायाकल्प के लिए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा घोषित विशेष पैकेज के तहत राज्य शासन के विभिन्न विभागों द्वारा ग्रामीण विकास के अनेक निर्माण कार्य अब तक पूरे किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सोनाखान को एक आदर्श गांव के रूप में विकसित करने और उस क्षेत्र के समग्र विकास के लिए कार्य योजना बना कर प्रथम चरण में विभिन्न विभागों द्वारा अब तक लगभग नौ करोड़ रूपए के कार्य मंजूर किए जा चुके हैं। इनमें से लगभग साढ़े सात करोड़ रूपए के कार्य पूर्ण हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और क्रांतिकारी वीर नारायण सिंह के कर्मक्षेत्र सोनाखान के विकास में धन राशि की कमी नहीं होने दी जाएगी। डॉ. सिंह ने कहा कि सोनाखान वास्तव में एक वीर-भूमि है, जिसे उसकी गरिमा के अनुरूप विकसित करना हम सबकी जिम्मेदारी है।

उल्लेखनीय है कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीद वीर नारायण सिंह ने सन् 1856 के भयानक अकाल से पीड़ित जनता के हितों की रक्षा के लिए सघन वन क्षेत्र में स्थित सोनाखान की पहाड़ियों में अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया था। इसके फलस्वरूप तत्कालीन ब्रिटिश हुकूमत ने उन्हें मृत्यु दण्ड दिया था।

वीर नारायण सिंह रायपुर शहर में 10 दिसम्बर 1857 को एक बहादुर युध्द बंदी के रूप में मौत की सजा को स्वीकार कर आजादी की बलिवेदी पर सरे-आम शहीद हो गए।

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा ग्राम सोनाखान में 12 अगस्त 2004 को मंत्रियों और जन-प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक लेकर गहन विचार-विमर्श के बाद उस ग्रामीण क्षेत्र के समन्वित विकास की कार्य योजना तैयार की गयी थी। इस विशेष पैकेज के तहत प्रथम वर्ष 2004-05 में पांच करोड़ रूपए के 32 निर्माण कार्य पूरे किए गए। अगले वर्ष 2005-06 में लगभग दो करोड़ 36 लाख रूपए के चौबीस निर्माण कार्यों को पूर्ण किया गया। पिछले वर्ष 2008-09 में बीस लाख 44 हजार रूपए के चार निर्माण कार्य पूर्ण किए गए। वर्ष 2007-08 से चालू वर्ष 2009-10 की अवधि में सोनाखान और आस-पास के गांवों के लिए अब तक लगभग 58 लाख रूपए के नये विकास कार्य भी मंजूर हो चुके हैं, जिनमें तालाब गहरीकरण, गौठान निर्माण, नाला बंधान तालाब जीर्णोध्दार आदि से संबंधित कार्य शामिल हैं। इसके अलावा समय-समय पर विभिन्न मदों में और भी कई अतिरिक्त कार्य वहां मंजूर किए गए। चालू वित्तीय वर्ष 2009-10 के लिए भी विशेष पैकेज के तहत विभिन्न विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं।

आदिम जाति विकास विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि राज्य सरकार ने सोनाखान को प्रदेश के ही एक अन्य महान समाज सुधारक संत गुरू घासीदास की तपोभूमि गिरौदपुरी से डामरीकृत पक्की सड़क द्वारा जोड़ने का भी निर्णय लिया है। सोनाखान से ग्राम महकम-बंगलापाली-महराजी होते हुए गिरौदपुरी तक दस किलोमीटर सड़क निर्माण और जोंक नदी पर क्षतिग्रस्त पुलिया के जीर्णोध्दार से दो महान विभूतियों के दोनों गांवों की दूरी 18 किलोमीटर से घटकर दस किलोमीटर रह जाएगी। इससे सोनाखान तक यात्री बसों का आवागमन भी सरल हो जाएगा। इसके लिए विशेष कार्ययोजना में लोक निर्माण विभाग के विभागीय मद से दो करोड़ रूपए का प्रस्ताव शामिल किया गया है।

कार्य योजना के प्रथम वर्ष में सोनाखान में लगभग सवा तीन करोड़ रूपए के कार्य पूरे किए गए। इनमें विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों के लिए दस लाख रूपए की लागत से लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्मित रंगमंच, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा द्वारा 48 लाख 61 हजार रूपए की स्वीकृत राशि से गली-सीमेंटीकरण और चार लाख 28 हजार रूपए की लागत से सीमेंटीकृत गली पर पुलिया निर्माण, लगभग 85 लाख रूपए की लागत से सोनाखान और वीर नारायणपुर की बस्तियों के आंतरिक मार्गों में सीमेंट कांक्रीटीकरण और नाली निर्माण जैसे कार्य भी शामिल हैं। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा दोनों गांवों में कुल दस लाख 52 हजार रूपए की लागत से सार्वजनिक पेयजल व्यवस्था के लिए नल-जल प्रदाय योजना भी पूर्ण कर ली गई है। इसके लिए दोनों गांवों में दस-दस स्टैण्ड पोस्ट भी बनवाए गए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि सोनाखान के प्राथमिक शाला भवन के लिए तीन लाख 04 हजार रूपए की लागत से अतिरिक्त कक्ष का निर्माण जनपद पंचायत कसडोल के माध्यम से किया जा चुका है। इसी कड़ी में पांच लाख रूपए की लागत से ग्राम वीर नारायणपुर में मिडिल स्कूल भवन और ग्राम पंचायत सोनाखान के लिए पांच लाख रूपए की लागत से कार्यालय भवन का निर्माण भी जनपद पंचायत कसडोल द्वारा पूर्ण कर लिया गया है। लोक निर्माण विभाग ने सोनाखान में पन्द्रह लाख रूपए की लागत से सामुदायिक भवन भी बनवाया है। उन्होंने बताया कि आदिम जाति विकास विभाग द्वारा पचास बालकों और पचास बालिकाओं के लिए कुल 89 लाख 48 हजार रूपए की लागत से दो अलग-अलग प्री-मैट्रिक छात्रावासों का निर्माण पूर्ण कर लिया गया है। प्रत्येक छात्रावास भवन के निर्माण में 44 लाख 74 हजार रूपए खर्च किए गए हैं। वर्ष 2004-05 की स्वीकृत कार्य योजना के तहत छात्रावास परिसर में आहाता निर्माण, भूमि समतलीकरण और ग्रील लगाने पर नौ लाख रूपए की धनराशि खर्च कर कार्य पूर्ण किया गया है। सोनाखान में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत उचित मूल्य दुकान और उसके गोदाम का निर्माण भी जनपद पंचायत कसडोल द्वारा पूरा कर लिया गया है। विद्युत व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए वहां 25 के.व्ही. ए. क्षमता के ट्रांसफार्मर तथा सौर ऊर्जा प्रणाली की स्थापना की गई है। इंदिरा आवास कॉलोनी और स्कूलपारा के विद्युतीकरण का कार्य भी पूरा हो गया है। सार्वजनिक निस्तारी सुविधा के लिए सोनाखान में राजा-रानी तालाब और नंदसागर तालाब के उन्नयन तथा उनमें घाट निर्माण कार्य 40 लाख रूपए की लागत से पूर्ण कर लिया गया है। इसके अलावा लगभग पांच लाख रूपए की लागत से पशु चिकित्सालय भवन और चार लाख रूपए की लागत से कांजी हाऊस का निर्माण किया गया है।

अधिकारियों ने जानकारी दी कि सोनाखान में शहीद स्मारक स्थल से लगी दस एकड़ की जमीन पर वीर वाटिका विकसित की गई है, जहां वन विभाग द्वारा वृक्षारोपण, सभा स्थल सौंदर्यीकरण और वीर-स्थल सौंदर्यीकरण पर कुल 33 लाख 75 हजार रूपए खर्च किए गए हैं। प्राथमिक शाला सोनाखान में तीन लाख रूपए की लागत से अतिरिक्त कक्ष और वीर नारायणपुर में पांच लाख रूपए की लागत से मिडिल स्कूल भवन का निर्माण जनपद पंचायत कसडोल द्वारा किया गया है। ग्राम सोनाखान की चार सौ एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई के लिए एक करोड़ 50 लाख रूपए की लागत वाले मकोरा बांध निर्माण का प्रस्ताव भी विशेष कार्ययोजना में शामिल किया गया है। सोनाखान के अलावा उस क्षेत्र के चिखली, कौहाकुड़ा, चानत, जोगी डीपा, बिट्कुली, पटियापाली, पेण्ड्रावन, कंजिया, देवतरी आदि गांवों में भी गली कांक्रीटीकरण सहित ग्रामीणों की मांग पर कई बुनियादी सुविधाएं विकसित की गई हैं।
- 09 दिसंबर 2009