जल संसाधन विभाग की समीक्षा

रायपुर, मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज यहां मंत्रालय में जल संसाधन विभाग की बैठक लेकर विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री श्री हेमचंद यादव सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने बैठक में इन सिंचाई परियोजनाओं की ताजा स्थिति के बारे में अधिकारियों से जानकारी ली।

डॉ. सिंह ने प्रदेश के जल संसाधनों के व्यापक सर्वेक्षण सहित मानसून की समाप्ति के बाद महानदी और शिवनाथ जैसी प्रमुख नदियों में रेत के नीचे भू-गर्भीय जल की उपस्थिति का पता लगाने के लिए भी तकनीकी सर्वेक्षण की जरूरत बतायी। उन्होंने इसके लिए दूरसंवेदी भू-उपग्रह की आधुनिक तकनीक का उपयोग किए जाने का भी सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में बरसात के दौरान तेज बहाव के कारण नदी-नालों के तटों में होने वाले कटाव को जन-जीवन की सुरक्षा की दृष्टि से रोकने के लिए जरूरी उपाय किए जाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी अपने विभाग की निर्मित और निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं का नियमित रूप से स्थल निरीक्षण करें। मुख्यमंत्री ने सिंचाई परियोजनाओं के समुचित रख-रखाव और उनसे संबंधित निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी विशेष रूप से बल दिया। उन्होंने आदिवासी उप योजना क्षेत्रों के अन्तर्गत ग्रामीण इलाकों में सिंचाई क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया।

बैठक में जल संसाधन विभाग द्वारा प्रदेश के नदी-नालों में निर्माणाधीन एनीकटों की प्रगति की भी समीक्षा की गयी। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को महानदी सिंचाई परियोजना, रविशंकर जलाशय (गंगरेल बांध), तांदुला जलाशय और मिनीमाता हसदेव बांगो परियोजना सहित कोडार, खारंग और मनियारी सहित विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं की ताजा स्थिति की जानकारी दी।

एशियन विकास बैंक की सहायता से संचालित छत्तीसगढ़ सिंचाई विकास परियोजना और विश्व बैंक की सहायता से संचालित हाइड्रोलॉजी प्रोजेक्ट फेस-2 की प्रगति के बारे में भी अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी।

जल संसाधन विभाग के सचिव श्री सी.के.खेतान ने अपने प्रस्तुतिकरण में विभागीय योजनाओं का ब्यौरा दिया। ऊर्जा विभाग के सचिव श्री अमन कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री के.सुब्रमणियम, जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता श्री फ्रांसिस और अन्य अनेक वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।
- 24 नवम्बर 2009