देश में इस्पात की मांग को घरेलू उत्पादन और आयात, दोनों के जरिए पूरा किया जा रहा है । अत: घरेलू बाजार में इस्पात की उपलब्धता घरेलू इस्पात उत्पादन और साथ ही आयात के जरिए पूरी की जा रही मांग को पूरा करने में समर्थ है । तथापि, देश में इस्पात की खपत घरेलू उत्पादन की तुलना में अधिक तेजी से बढ रही है ।
संयुक्त संयंत्र समिति द्वारा जारी किए गए अनंतिम आंकड़ों के अनुसार चालू वर्ष में अप्रैल-नवम्बर तक की अवधि के दौरान घरेलू उत्पादन में 3 प्रतिशत की बढोतरी हुई है जबकि इस्पात की खपत में 8.1 प्रतिशत की बढोतरी हुई है । भारत में इस्पात की खपत में होने वाली अधिकांश बढोतरी हाउसिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर गुड्स सैक्टरों के कारण हो रही है ।
तथापि, इसे ध्यान में रखते हुए कि भविष्य में भारत में इस्पात की मांग बढने क़ी संभावना है, सरकार देश में नई इस्पात उत्पादन क्षमताएं स्थापित करने की सुसाध्य बना रही है । इस्पात मंत्रालय के नियंत्रणाधीन सरकारी क्षेत्र की इकाइयों , नामत: स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड और राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड ने पहले ही प्रमुख क्षमता विस्तार योजनाएं शुरू कर दी हैं ।
सेल की अपरिष्कृत इस्पात की मौजूदा 13.82 मिलियन टन वार्षिक क्षमता को बढाक़र वर्ष 2012-13 तक 23.46 एमटीपीए करने की योजना है । इसी प्रकार आरआईएनएल भी अपनी द्रव इस्पात क्षमता को 3.0 एमटीपीए से बढाक़र वर्ष 2011-12 तक 6.3 एमटीपीए कर रहा है ।
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