People-communications based agricultural extension scheme in Chhattisgarh
Agriculture officers will cooperate and discuss with AIR & Doordarshan officers
आकाशवाणी-दूरदर्शन पर होगा नई कृषि तकनीकों का प्रचार-प्रसार
जन-संचार आधारित कृषि विस्तार योजना लागू
रायपुर, 08 जून 2009 - छत्तीसगढ़ राज्य में खेती के आधुनिक तौर तरीकों और कृषि विभाग की योजनाओं को किसानों तक पहुंचाने के लिए आकाशवाणी और दूरदर्शन के माध्यम से भी कृषि विस्तार कार्यक्रमों का और अधिक व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। इसके लिए पूरे प्रदेश में जन-संचार पर आधारित कृषि विस्तार योजना संचालित की जा रही है। राज्य शासन द्वारा इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों को आकाशवाणी और दूरदर्शन के अधिकारियों से विचार-विमर्श कर पूरा सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के माध्यम से इन कार्यक्रमों के प्रति कृषकों से प्राप्त फीड बेक एकत्र करने के निर्देश भी दिए गए हैं। विभागीय अधिकारियों को कृषकों के द्वारा दिए गए सुझावों से कार्यक्रमों के प्रति उनकी रूचि तथा अच्छे लगने वाले कार्यक्रमों की जानकारी भी इकट्ठी करने के निर्देश दिए गए हैं।
विभागीय अधिकारियों ने योजना के बारे में आज यहां बताया कि इसका क्रियान्वयन दूरदर्शन तथा आकाशवाणी के केन्द्रों के माध्यम से पूरे छत्तीसगढ़ में किया जा रहा है। योजना में कृषि तथा उससे जुड़े व्यवसायों की जानकारी किसानों तक पहुंचाने में मदद मिल रही है, जिसका सीधा फायदा किसानों को हो रहा है। मौसम संबंधी तात्कालिक जानकारी हो या फसलों के बीज की जानकारी से लेकर कीट-व्याधि के प्रकोप व रोकथाम की जानकारी सभी कुछ इन केन्द्रों द्वारा तैयार किए गए कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाया जा रहा है। अब इन केन्द्रों से कृषि विभाग द्वारा कृषि, के साथ-साथ मछलीपालन, सहकारिता, पशुपालन जैसे गांवों के परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण विषयों को भी शामिल किया जा रहा है। साथ ही को-ऑपरेटिव एक्ट की प्रमुख बातों को भी इन कार्यक्रमों में शामिल कर राज्य में सहकारिता विस्तार पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि दूरदर्शन व आकशवाणी से प्रसारित होने वाले विभाग से संबंधित कार्यक्रमों की गुणवत्ता को और अच्छा बनाया जा रहा है। रोचक कार्यक्रम बनाए जाने से कृषक अधिक से अधिक संख्या में अपनी रूचि से कार्यक्रम देखेंगे। उन्होंने बताया कि प्रसारण से पहले एवं बाद किसान काल सेन्टर योजना की भी जानकारी दी जा रही है, जिससे इस योजना के प्रति किसानों में जागरूकता आए और किसानों की अधिक से अधिक शंकाओं का समाधान हो सके। उन्होंने बताया कि खेती-किसानी से संबंधित विषयों व क्रियाकलापों के साथ-साथ सामाजिक व स्थानीय विषयों पर भी कार्यक्रम तैयार कर प्रसारित किए जाएंगे। इन में स्थानीय विषय लेकर ग्रामीणों में व्याप्त अंध विश्वास से छुटकारा पाने जैसे कार्यक्रम भी शामिल किए जाएंगे। अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ के सफल स्वसहायता समूहों, गांव में बैकों से दी जाने वाली ऋण सुविधाओं, वाटर रिचार्जिंग, ड्रिप तथा स्पिंकलर तकनीक, जानवरों के नस्ल सुधार तथा उनके संतुलित पोषक आहार निर्माण जैसे विषयों पर भी अब शीघ्र ही दूरदर्शन व रेडियो पर कार्यक्रम प्रसारित किए जा रहे हैं। कार्यक्रमों को क्षेत्रीय केन्द्रों से क्षेत्रीय भाषाओं में भी तैयार कर प्रसारित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि बरसात के पानी को इकट्ठा करने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लागू करने का कार्यक्रम, नलकूप रिचार्ज करने की विधि, एक्सटेंशन रिफार्म (आत्मा) योजना का प्रचार-प्रसार, कृषि विश्वविद्यालय तथा कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा किए जा रहे अनुसंधानों व कार्यों का समावेश भी दूरदर्शन तथा आकाशवाणी से प्रसारित कार्यक्रमों में क्षेत्रवार किया जा रहा हैं।
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