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Chhattisgarh Dairy Waste Management By American Company

Efficient management of dairy wastes can give people many facilities: Mr. Chandra Shekhar Sahu

Minister of Agriculture meets the U.S. Environment scientist
Dr P.V. Sundareshwar from Native Americal Environmental Ltd

डेयरियों से निकले अपशिष्टों के कुशल प्रबंधन से लोगों को मिल सकती हैं अनेक सुविधाएं : श्री चन्द्रशेखर साहू

कृषि मंत्री से की अमेरिका के पर्यावरण वैज्ञानिक ने मुलाकात

रायपुर, 27 मई 2009 - कृषि, पशुपालन एवं मछलीपालन मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू से आज यहां मंत्रालय स्थित उनके कक्ष में अमेरिका के पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. पी.व्ही. सुन्दरेश्वर ने भेंट कर राज्य में संचालित डेयरियों सहित गांवों, फल एवं सब्जियों मंडियो से निकले वाले अपशिष्टों के बेहतर प्रबंधन उनके लाभकारी उपयोग पर विचार-विमर्श किया। श्री साहू ने छत्तीसगढ़ में भूमि संरचना और भू-स्वास्थ्य में सुधार सहित वातावरण के बढ़ते तापमान से निपटने के तरीकों पर भी डॉ. सुन्दरेश्वर से चर्चा की। नेटिव अमेरिकन इनवायरमेन्टल लिमिटेड के वैज्ञानिक ने राजधानी रायपुर के लिए डेयरी अपशिष्टों से बायोगैस उत्पादन सहित जैविक खाद बनाने और डेयरी व्यवसायियों को लाभ का अतिरिक्त साधन उपलब्घ कराने की विस्तृत कार्ययोजना से कृषि मंत्री को अवगत कराया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव श्री के. सुब्रमण्यम भी उपस्थित रहें।

कृषि मंत्री ने पर्यावरण वैज्ञानिक द्वारा प्रस्तुत कार्ययोजना का अध्ययन कर बताया कि रायपुर सहित छत्तीसगढ़ में स्थापित गोकुल नगरों की डेयरियों से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों जैसे- गाय का गोबर, फूल-फल और सब्जी मंडियों के कचरे आदि का लाभदायक प्रबंधन करके जनसामान्य को कई सुविधाएं उपलब्घ कराई जा सकती हैं। मवेशियों द्वारा उत्पादित मल-मूत्र और अपशिष्टों को एकत्रित कर किसी बड़े बायोगैस उत्पादक प्लांट में डालकर बायोगैस का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा सकता है। इस प्रकार उत्पादित गैस को कम कीमत पर जनसामान्य ईधन के रूप में उपयोग के लिए जनसामान्य को उपलब्घ कराया जा सकता है। कृषि मंत्री ने बताया कि इन बायोगैस प्लांटों में बाय प्रोडेक्ट के रूप में बनी खाद को जैविक खाद के रूप में किसानों को भी कम दाम पर खेती के काम के लिए दिया जा सकता है, साथ ही बायोगैस के प्रयोग से कोयला, लकड़ी जैसे ईंधनों की बड़े पैमाने पर बचत भी की जा सकती है। उन्होंने आशा जताई कि इस प्रकार के प्रयोग से छत्तीसगढ़ सहित देश को विकसित राष्ट्रों द्वारा दिए जा रहे कार्बन क्रेडिट का भी भरपूर लाभ मिल सकता है। श्री साहू ने डेयरियों के अपशिष्टों के कुशल और लाभकारी प्रबंध के लिए निजी क्षेत्रों की भागीदारी सहित पब्लिक प्राइवेट पॉटनरशिप से भी संभावना तलाशने पर मुख्यमंत्री के सचिव सहित पर्यावरण वैज्ञानिक से विस्तृत चर्चा की।

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