Ten chemical-free area in one thousand Hectare of Bastar Chhattisgarh
Registration will be made of Chhattisgarh farmers engaged in Organic farming
Raipur Organic farming News In Hindi with more details -
दक्षिण बस्तर जिले में जैविक खेती को बढ़ावा
एक हजार हेक्टयर क्षेत्र में बनेंगे दस रसायन मुक्त क्षेत्र
प्रदेश में जैविक खेती करने वाले किसानों का भी होगा पंजीयन
रायपुर, 29 मई 2009 ; छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा) जिले में प्रदूषणरहित जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। दंतेवाड़ा में इसके तहत एक-एक सौ हेक्टेयर के दस क्षेत्रों का चयन कर उन्हें रसायन मुक्त क्षेत्र (केमिकल फ्री जोन) के रूप में विकसित किया जाएगा। इन क्षेत्रों में किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित करने के लिए उन्हें शासन द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत नियमानुसार सुविधाएं एवं अनुदान भी उपलब्ध करायी जाएंगी। इससे दंतेवाड़ा जिले की पहचान जैविक खेती वाले जिले के रूप में बन सकेगी। छत्तीसगढ़ शासन ने जैविक खेती करने वाले किसानों का पंजीयन कृषि विभाग के माध्यम से कराए जाने का निर्णय भी लिया है। विभाग द्वारा जैविक खेती करने वाले किसानों का पंजीयन करने बीज प्रमाणीकरण संस्था को नोडल एजेंसी बनाया गया है। इच्छुक कृषक रसायनिक खाद के उपयोग के बगैर लगाई जाने वाली अपनी फसलों का पंजीयन यहां करा सकते हैं।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा सहित प्रदेश के जिन जिलों में किसान रासायनिक खादों का उपयोग कम करते हैं, उन्हें विशिष्ट पहचान दिलाने और उनके इस परम्परा का लाभदायक उपयोग करने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा ऐसे जिलों एवं क्षेत्रों में जैविक खेती को बढ़ावा देने की मुहिम प्रारंभ की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि देश में जैविक खेती कर फसल उत्पादन करने वाले किसानों को उनकी उपज का मनचाहा मूल्य तो मिलता है। इससे किसानों को ज्यादा आर्थिक लाभ के साथ-साथ उन्हें देश-विदेश में एक विशिष्ट पहचान भी मिलती है। इसे ध्यान में रखकर ही जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने ऐसे क्षेत्राें को विकसित करने की जिम्मेदारी उठाई है।
उन्होंने बताया कि ऐसे क्षेत्रों में जैविक खेती करने वाले किसानों को राज्य शासन द्वारा सभी संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जिले में 100-100 हेक्टेयर क्षेत्र में बिना रासायनिक खाद का उपयोग किए कृषि उत्पादन लिए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। लक्ष्य की शत प्रतिशत पूर्ति के लिए कृषि विभाग ने विस्तृत कार्य योजना भी तैयार कर ली है। किसानों को इन क्षेत्रों में रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग किए बिना जैविक खेती करने के लिए हरी खाद, केचुआ खाद, एकीकृत जीव नाशी प्रबंधन आदि योजनाओं के तहत अधिक से अधिक लाभ पहुंचाया जाएगा। इन क्षेत्रों में किसानों को हरी खाद बीज पर 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। विभिन्न फसलों के लिए राईजोनियम, पी.एस.बी., एजेक्टोबेक्टर आदि कल्चरों के पैकेट भी अनुदान पर किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे। किसानों द्वारा कम्पोस्ट खाद निर्माण के लिए नाडेप टांका बनाने के लिए भी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। नाडेप टांका निर्माण के लिए सभी वर्गों के लघु सीमांत किसानों को एक हजार दो सौ रूपए तक, अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग के किसानों को आठ सौ रूपए तथा सामान्य श्रेणी के किसानों को चार सौ रूपए प्रति नाडेप टांका की दर से अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। इन क्षेत्रों के किसानों द्वारा केचुआ खाद बनाने के लिए वर्मी कम्पोस्ट टांका निर्मित करने बारह हजार रूपए प्रति यूनिट शासकीय अनुदान दिया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि जैविक खेती के रूप में विकसित किए जाने वाले क्षेत्रों में एकीकृत जीव नाशी प्रबंधन योजना के तहत किसानों को ट्राईको डरर्मा, फैरामेन ट्रेप, नीम उत्पादन, एन.पी.व्ही. आदि का भी नि:शुल्क वितरण किया जाएगा।
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