Chhattisgarh Self Employment Training Plan
So far, more than 25 thousand young people got a free self-employment training
This year target of 10 thousand young people to be trained
Raipur, May 17, 2009 - Through employment offices in Chhattisgarh self-employment training scheme is operated. During past five years free training has been given to more than 25 thousand young people in various businesses in it. Training of ten thousand young people are targeted in current financial year 2009-10 under the scheme.
Hindi छत्तीसगढ़ स्वरोजगार प्रशिक्षण योजना
अब तक 25 हजार से ज्यादा युवाओं को मिला नि:शुल्क स्वरोजगार प्रशिक्षण
इस वर्ष 10 हजार युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य
रायपुर, 17 मई 2009 - छत्तीसगढ़ में रोजगार कार्यालयों के माध्यम से स्वरोजगार प्रशिक्षण योजना संचालित होती है। इसमें विगत पांच वर्ष में 25 हजार से भी ज्यादा युवाओं को विभिन्न व्यवसायों में नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जा चुका है। चालू वित्तीय वर्ष 2009-10 में इस योजना के तहत दस हजार युवाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य में उद्योग और व्यापार गतिविधियों के तेजी से हो रहे विकास को ध्यान में रखकर जनशक्ति नियोजन विभाग को रोजगार कार्यालयों में पंजीकृत और कम पढ़े-लिखे बेरोजगारों के लिए ऐसे अल्पकालीन प्रशिक्षण पाठयक्रम संचालित करने के निर्देश दिए हैं, जिनमें प्रशिक्षित होने पर उन्हें विभिन्न औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में रोजगार का मौका मिल सके अथवा वे अपनी रोजी-रोटी के लिए स्वयं का व्यवसाय भी शुरू कर सकें। प्रदेश के रोजगार कार्यालय अब जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्रों के रूप में संचालित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए रोजगार एवं प्रशिक्षण संचालनालय द्वारा वर्ष 2004-05 में 38 व्यवसायों को चिन्हांकित कर नि:शुल्क प्रशिक्षण योजना की शुरूआत की गयी। संचालनालय के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि योजना के तहत अब तक 25 हजार से ज्यादा युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। जिन व्यवसायों में उन्हें प्रशिक्षित किया गया है, उनमें कम्प्यूटर परिचालन, स्कूटर और मोपेड आदि दोपहिया वाहनों की मरम्मत, सायकल और घड़ी मरम्मत, स्क्रीन प्रिंटिंग, रसोई गैस चूल्हे और प्रेशर कुकर तथा मिट्टी तेल के स्टोव की मरम्मत, प्लम्बर, वेल्डर, मोटर कार मेकेनिक, ट्रेक्टर मेकेनिक, मोबाइल फोन मरम्मत, मोमबत्ती और चाक निर्माण, सिलाई-कढ़ाई, स्वेटर बुनाई, ईट और खपरा निर्माण, कृत्रिम आभूषण निर्माण, रफूगिरी एवं रंगाई, स्टेशनरी निर्माण, मशरूम उत्पादन, डिटर्जेंट पाउडर उत्पादन, बेकरी उद्योग, पशुपालन, मुर्गी पालन, मसाला उद्योग, बागवानी एवं नर्सरी, रसोई कार्य, चाट दुकान, इंग्लिश कोचिंग कक्षाओं के संचालन, स्व-सहायता समूहों के हिसाब-किताब के समुचित रख-रखाव, लांड्री, हेयर कटिंग सेलून, ब्यूटीपार्लर और चाय-नाश्ते की दुकानों का संचालन, बच्चों के लिए झूला घरों का संचालन, बिजली के उपकरणों की मरम्मत, घरों की साज संभाल और नि:शक्तजनों तथा बुजुर्गों की देख-भाल जैसे कार्य भी शामिल हैं।
अधिकारियों ने बताया कि प्रशिक्षण के बाद संबंधित युवाओं को स्वरोजगार शुरू करने के लिए राष्ट्रीयकृत बैंकों से ऋण दिलाने का भी प्रयास किया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए हर साल विज्ञापन प्रकाशित कर इच्छुक युवाओं से आवेदन पत्र आमंत्रित किए जाते हैं। यह योजना अधिकांशत: ग्रामीण परिवेश के उन युवाओं के लिए लाभदायक है, जिन्हें स्कूल-कॉलेज अथवा अन्य प्रशिक्षण संस्थाओं के नियमित पाठयक्रमों में औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने का समुचित अवसर नहीं मिल पाया है। योजना की विस्तृत जानकारी जिला मुख्यालयों में स्थित रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्रों (रोजगार कार्यालयों) से प्राप्त की जा सकती है।
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