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Danteshwari temple Japanese style of Pagoda for devotees

Raipur, Chhattisgarh June 24, 2009 - In Chhattisgarh's remotest South Bastar region tribal, Dantewada district headquarters, the ancient temple of Bastar's famous adorable deity Goddess Mai Danteshwari will now have Japanese style 'Pagoda' for rest of devotee tourists.

Raipur News Danteshwari Mandir Story Details in Hindi -

दंतेश्वरी मंदिर में श्रृद्वालुओं के विश्राम के लिए बनेंगे जापानी स्टाईल के पैगोड़ा

रायपुर, 24 जून 2009 - छत्तीसगढ़ के दूरस्थ आदिवासी अंचल दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय में स्थित बस्तर की प्रसिध्द आराध्य देवी माई दंतेश्वरी के प्राचीन मंदिर में श्रध्दालुओं के विश्राम के लिए जापानी पध्दति के विश्राम स्थल 'पैगोड़ा' निर्मित किए जा रहे हैं। राज्य शासन द्वारा जिला प्रशासन एवं माई दंतेश्वरी मंदिर समिति के माध्यम से इन दिनों मंदिर परिसर में सौन्दर्यीकरण का कार्य तेजी से कराया जा रहा है। डंकिनी-शंखनी नदी में सीढ़ीनुमा रिटर्निंग वाल के साथ ही मंदिर के पीछे बने रहे उद्यान में भी श्रृद्वालुओं के बैठने के लिए जापानी स्टाईल के पैगोड़ा बनाये जा रहे है। प्रदेश सहित देश-विदेश से हजारों की संख्या में माई दंतेश्वरी जी के दर्शन के लिए आने वाले श्रृध्दालुओं की सभी प्रकार की सुविधाएं देने और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा प्रदेश के धार्मिक महत्व के स्थानों एवं पर्यटन स्थलों पर सभी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। इसी कड़ी में दंतेवाड़ा स्थित मांई दंतेश्वरी के दर्शन हेतु आने वाले श्रृध्दालुओं को दिक्कत एवं परेशानी से बचाने के लिए जिला प्रशासन दंतेवाड़ा एवं टेम्पल कमेटी द्वारा दंतेश्वरी मंदिर परिसर में सौन्दर्यीकरण व जीणोध्दार का कार्य तीव्र गति से संचालित किया जा रहा है।

सौन्दर्यीकरण कार्य के तहत मंदिर के प्रवेशद्वार के नजदीक जयस्तंभ चौक से मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार तक अतिक्रमण व पेड़ को हटाकर सड़क का चौड़ीकरण कार्य किया जा चुका है। नवरात्रि एवं अन्य धार्मिक आयोजनों के समय मंदिर परिसर में श्रध्दालुओं के अधिक संख्या में आने के कारण इस सड़क में आने व जाने के लिए अलग-अलग रास्ते डिवाइडर निर्मित कर बनाए गए हैं। इस डिवाइडर में दोनों ओर विद्युत व्यवस्था के लिए सौर उर्जा चलित प्रणाली स्थापित की गयी है साथ ही जय स्तंभ चौक पर हाई मास्क लाईट भी लगायी गयी है। मंदिर परिसर में श्रृध्दालु को धोती बदलने के लिए बांस की चटाई से कक्ष भी बनाया गया है।

मंदिर दर्शन हेतु प्रतिवर्ष क्वांर व चैत्र की नवरात्र में दूर-दूर से हजारों की संख्या में श्रृध्दालु पैदल आते है जिनके माई जी के दर्शन उपरांत आराम से बैठने हेतु मंदिर के पीछे शीतल, छायादार, सुगंन्धित व पुष्पदार पौधो व वृक्षों से सुसज्जित उद्यान का निर्माण तेजी से कराया जा रहा है उद्यान के लिए भूमि के समतलीकरण का कार्य पूर्ण हो चुका है।

दर्शन के उपरांत श्रृध्दालुओं को कुछ देर छांव में आराम से बैठने तथा प्रसाद व भोजन आदि ग्रहण करने के लिए इस उद्यान में भी जापानी स्टाईल के दस पैगोड़ा का निर्माण भी किया जा रहा है। इसके अलावा मंदिर के बगल में डंकिनी व शंखनी नदी के संगम का विहंगम दृश्यावलोकन के लिए दोनों नदियों में सीढ़ीनुमा रिटर्निग वाल का निर्माण कराया जा रहा है। शासन द्वारा सौंदर्यीकरण से संबंधित सभी निर्माण कार्य जल्द से जल्द पूरे करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

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