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Wild Elephant Attack Kill Befriend Problem Solution

Chhattisgarh Elephant - Chhattisgarh Elephant Problem will be solved by Documentary film-maker Mike Pandey - Mike Pandey Filmmaker and Conservationist Put Report on Janglee Hathi Samsya to Chhattisgarh- Mike Pandey is Earth Matters head - Chhattisgarh rural people, Chhattisgarh habitat of forest are affected with wild elephants and will be saved with help of "Hathi Gram" or "Elephant Village".

Making of "Elephant Village" will save Chhattisgasrh villagers from wild elephants fatal attacks.

जंगली हाथियों की समस्या से निपटने राज्य के अभ्यारण्यों में 'हाथी ग्राम' बनाने का सुझाव
मुख्यमंत्री के सामने श्री माईक पाण्डेय ने रखा अपना प्रतिवेदन
रायपुर, 29 मई 2009 - मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य में जंगली हाथियों से ग्रामीणों को हो रही विभिन्न प्रकार की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए आज शाम मंत्रालय में समाज सेवी संस्था 'अर्थ मेटर्स फाउंडेशन' के प्रमुख श्री माईक पाण्डेय और उनके साथ आए विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श किया। बैठक में वन मंत्री श्री विक्रम उसेण्डी, संसदीय सचिव श्री भैयालाल राजवाड़े, राज्य शासन के मुख्य सचिव श्री पी.जॉय उम्मेन और अपर मुख्य सचिव श्री एस. मिंज सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने जंगली हाथियों की चुनौती से निपटने के लिए इस संस्था के साथ लगभग डेढ़ वर्ष पहले 29 दिसम्बर 2007 को विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार करने के उद्देश्य से एक समझौता (एम.ओ.यू.) किया था।

मुख्यमंत्री के समक्ष आज की बैठक में श्री पाण्डेय ने अपने इस परियोजना प्रतिवेदन के विभिन्न पहलुओं पर बिन्दुवार जानकारी दी। श्री पाण्डेय ने मानव-हाथी द्वंद्व प्रबंधन और हाथी ग्राम विकसित करने का सुझाव देते हुए लगभग आठ करोड़ रूपए की तीन वर्षीय परियोजना की रूप रेखा का प्रस्तुतिकरण दिया। श्री पाण्डेय के साथ आए केन्द्र सरकार के प्रोजेक्ट एलिफेंट के पूर्व निर्देशक श्री पी.के.सेन और अन्य विशेषज्ञों ने भी अपने विचार रखे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार श्री पाण्डेय के प्रतिवेदन प्रतिवेदन के सभी बिन्दुओं पर गंभीरता से विचार करेगी और श्री पाण्डेय की संस्था के साथ निरंतर सम्पर्क कायम रखते हुए उनके अनुभवों का लाभ लेकर एक दीर्घकालीन और अल्पकालीन समन्वित कार्य योजना तैयार की जाएगी।

डॉ. सिंह ने श्री पाण्डेय के प्रतिवेदन पर अपनी सैध्दांतिक सहमति प्रकट की। उन्होंने कहा कि श्री पाण्डेय के सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। अपने प्रस्तुतिकरण में श्री माईक पाण्डेय ने राज्य में हाथियों के लिए एक नये गलियारे के विकास सहित कई सुझाव दिए। उन्होंने समस्यामूलक हिंसक हाथियों के अलावा वृध्द और बीमार हाथियों के लिए 'हाथी ग्राम' बसाने का भी सुझाव दिया। उनका कहना था कि अचानकमार, बादलखोल, भारमदेव, सेमरसोत और तेमोरपिंगला जैसे अभ्यारण्यों और गुरूघासीदास राष्ट्रीय उद्यान तथा मैनपाट के वन क्षेत्रों में उपयुक्त स्थान चिन्हांकित कर हाथी ग्राम भी बसाए जाने चाहिए, जिनमें से प्रत्येक में 40 से 50 हाथियों के लिए लगभग एक हजार एकड़ वन क्षेत्र में हाथियों के लिए शेड निर्माण, जल स्त्रोत निर्माण, अधिक से अधिक मिश्रित स्थानीय प्रजाति के बांस, महुआ, पीपल आदि वृक्ष लगाए जा सकते हैं। हाथी ग्रामों के शेष 500 एकड़ क्षेत्र में महावतों के परिवारों के लिए चिकित्सा सुविधा युक्त आवास निर्माण, महावत प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना, हाथियों के इलाज के लिए अस्पताल, ग्रामीणों की सुविधा के लिए सौर ऊर्जा संयंत्र, बायो गैस संयंत्र आदि की स्थापना का भी सुझाव उन्होंने दिया है। श्री पाण्डेय ने अपने प्रतिवेदन में और भी कई सुझाव दिए, जिनमें जंगली हाथियों से निपटने के लिए हुल्ला पार्टी की मदद से परम्परागत ढंग से ढोल बजा कर मशाल की मदद से उन्हें वनों में खदेड़ना, पटाखों और तेज रोशनी के टार्च द्वारा हाथी निरोधी दस्ते के मार्ग दर्शन में हाथियों को रिहायशी क्षेत्रों से दूर वनों में भगाना, वन विभाग के अमले, वन प्रबंधन समिति और हाथी निरोधी दस्ते द्वारा जंगली हाथियों के विचरण पर निगाह रखना, ग्रामीणों को भूमिगत अन्न भण्डारों के निर्माण में मदद करना, हिंसक जंगली हाथियों को ट्रेन्क्यूलाईजर से बेहोश कर उनमें कॉलर आईडी लगाकर उनके आवागमन की निगरानी करना, प्रभावित परिवारों के लिए समुचित आर्थिक सहायता पेकेज, फसल पर धावा बोलने वाले जंगली हाथियों को पालतू हाथी (कुनकी) की मदद से नियंत्रित करना जैसे उपाय शामिल हैं।

यह भी उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों में सबसे पहले वर्ष 1988 में 18 हाथियों का झुंड पड़ोसी राज्य झारखंड (तत्कालीन बिहार) से आया था। वर्ष 1993-94 में कर्नाटक के विशेषज्ञों की मदद से तेरह हाथियों को विशेष अभियान चलाकर पकड़ा गया। विशेषज्ञों के अनुसार अब हाथियों ने छत्तीसगढ़ में अपना स्थायी रहवास बना लिया है। समस्या को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ विधानसभा में फरवरी-मार्च 2005 के सत्र में रायगढ़, जशपुर और कोरबा जिलों में हाथी परियोजना के अन्तर्गत राज्य में हाथी अभ्यारण्य बनाने के लिए केन्द्र सरकार से अनुमति और आर्थिक सहयोग प्राप्त करने हेतु अशासकीय संकल्प पारित किया गया। केन्द्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय की उच्च स्तरीय समिति ने छत्तीसगढ़ को हाथी प्रोजेक्ट में शामिल करने के लिए प्रस्तावित हाथी रिजर्व क्षेत्रों का मार्च 2007 में दौरा किया, जिसके अनुसरण में राज्य को हाथी परियोजना में शामिल करने और दो हाथी रिजर्व-क्रमश: बादलखोल-मनोरा-तमोरपिंगला और लेमरू को बनाने की सहमति भारत सरकार से प्राप्त हुई।

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